Shirdi Sai Baba Story In Hindi ( Part 1 ) साई बाबा के चमत्कार

आज के इस साई बाबा की कहानी ( Sai Baba Story In Hindi) में साई बाबा द्वारा पानी से दिए जलाने और जलती हुई धूनी में हाथ डालकर एक नवजात बच्चे की जान बचाने की कहानियों का वर्णन है। साई बाबा के बारे में आज कौन नहीं जानता। शिरडी में स्थित sai baba sansthan द्वारा संचालित साई बाबा का मंदिर करोड़ो भक्तों की आस्था का केंद्र है। या देश विदेश से बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन करने आते हैं और जो बाबा के दर्शन करने नहीं आ पाते वो घर बैठे sai baba live darshan करते हैं। साई बाबा ऐसे महान संत हैं जिनकी तारीफ़ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। आज इस लेख में हम आपको बताएँगे साई बाबा के कुछ चमत्कारों के बारे में। अगर आप चाहें तो Sai Baba Ke Chamatkari Mantra के बारे में जान सकते हैं जिनका जाप अत्यंत उपयोगी है।

साई बाबा जब तक जीवित थे तब तक उनके हाथों से चमत्कार होते रहे और आज भी बाबा के भक्त बाबा के चमत्कारों का अनुभव करते रहते हैं। आइये साई बाबा के जीवनी का वर्णन करने वाली किताब Sai Satcharitra में वर्णित कुछ चमत्कारों के बारे में जानते हैं।

  • साई बाबा को प्रकाश से बहुत प्रेम था। वे प्रायः गांव के दुकानदारों से भिक्षा में तेल मांग कर लाया करते थे और मस्जिद में रात भर दिए जलाया करते थे। एक दिन ऐसा हुआ की गांव के पुरोहित ने जो की बाबा से जलता था उसने गांव के सभी दुकानदारों को बाबा के खिलाफ भड़का दिया। गांव के दुकानदारों ने संगठित होकर ये निश्चय किया की साई बाबा को कोई दिया जलाने के लिए तेल नहीं देगा। साई बाबा को उस दिन कहीं से तेल नहीं मिला और वो खाली हाथ मस्जिद लौट गये। बाबा ने किसी से कोई बात नहीं की और चुपचाप दीये में सुखी बतियाँ डाल दी। इसके बाद पहले का थोड़ा सा बचा हुआ तेल बाबा ने पानी में मिलाया और वो तेल मिश्रित पानी बाबा पी गए। इसके बाद बाबा ने उस पानी को वापस एक पात्र में उलट दिया और उसे दीये में डालकर जला दिया। जब गांव के दुकानदारों ने पहले की भांति सारी रात दिया जलते देखा तो वो बहुत शर्मिंदा हुए और बाबा से अपने किये की माफ़ी मांगने लगे। बाबा ने बिना किसी रंजिश के उन्हें मना कर दिया और आगे से सच की राह पर चलने की नसीहत दी।
  • सन १९१० की बात है दिवाली का दिन था बाबा धूनी के पास बैठके आग ताप रहे थे और धूनी में लकड़ियां डाल रहे थे। धूनी की आग बहुत तेजी से जल रही थी की तभी अचानक बाबा ने अपना हाथ जलती हुई धूनी में डाल दिया। उन्हें ऐसा करते देख कर उनका नौकर माधव और माधवराव देशपांडे ने बाबा को जबरदस्ती पीछे खींचा और पूछने लगे की बाबा अपने ऐसा क्यों किया। बाबा ने कहा की यहाँ से कुछ दूरी पर एक लुहारिन भट्ठी धौंक रही थी और उसने कमर पर उसने उसके बच्चे को बाँध रखा था। अचानक उसके पति ने उसे बुलाया तो वो उठके पति के पास चली गयी और उसे इस बात का स्मरण ही नहीं रहा की उसके कमर पर बंधा उसका बच्चा भट्ठी में गिर पड़ा है। मैंने अपना हाथ धूनी में डालके उस बच्चे के प्राण बचा लिए हैं और इसके लिए मुझे मेरे हाथ के जल जाने का कोई दुःख नहीं है।

साई बाबा का जीवन बड़ा ही सादगी भरा था और वो जीवन भर लोगों की सेवा करते रहे। अगले लेख में साई बाबा से जुड़ीं किसी अन्य कहानी की चर्चा होगी। अगर आपको हमारा ये लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर करें और दूसरे साई भक्तों तक पहुँचाएँ। अजनाभ से जुड़ने के लिए और आपका प्यार देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। जय हिन्द।

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